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October 4, 2018

Manu Gaur President, Taxpayers Association of Bharat (TAXAB) delivered a Talk on the ill-effects of overpopulation at DIT & IMS University

Manu Gaur President, Taxpayers Association of Bharat (TAXAB) delivered a Talk on the ill-effects of overpopulation at a joint session of IMS Unison University & DIT […]
September 18, 2018

Manu Gaur President, Taxpayers Association of Bharat (TAXAB) delivered a Talk on the ill-effects of overpopulation at CCS Haryana Agricultural University

Manu Gaur President, Taxpayers Association of Bharat (TAXAB) delivered a Talk  on the ill-effects of overpopulation at Hisar University (Haryana), and interacted with around 1500+ students and […]
August 14, 2018

एक और स्वतंत्रता संग्राम की ओर भारत

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय दुनिया की जनसंख्या लगभग उतनी ही थी जितनी आज अकेले भारत की है। आज भारत की फिर से एक और स्वतंत्रता संग्राम की आवश्यकता है। बढ़ती आबादी के बोझ से स्वतंत्रता। आजादी की 72 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज मेरे द्वारा भारत की जनसंख्या से जुड़े कुछ तथ्य साधारण भाषा में इस देश के समक्ष रखने का प्रयत्न किया जा रहा है।
July 31, 2018
Population surge to blame for much of India’s troubles

Population surge to blame for much of India’s troubles

वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव सभ्यता की उत्पत्ति को लगभग 1 लाख 30 हजार साल से 1 लाख 60 हजार साल हो चुके हैं और हमें डेढ़ लाख साल लगे दुनिया की जनसंख्या को 100 करोड़ पहुंचाने में। सन् 1804 में दुनिया की आबादी ने पहली बार 100 करोड़ के आंकड़े को छुआ। अगले 123 साल में मतलब सन् 1927 में दुनिया की आबादी बढ़कर 200 करोड़ को गई। फिर भी इन्सान को समझ नहीं आया कि वो किस दिशा में बढ़ रहा है।
July 10, 2018
विश्व की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश मेरा भारत महान।

विश्व की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश मेरा भारत महान।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव सभ्यता की उत्पत्ति को लगभग 1 लाख 30 हजार साल से 1 लाख 60 हजार साल हो चुके हैं और हमें डेढ़ लाख साल लगे दुनिया की जनसंख्या को 100 करोड़ पहुंचाने में। सन् 1804 में दुनिया की आबादी ने पहली बार 100 करोड़ के आंकड़े को छुआ। अगले 123 साल में मतलब सन् 1927 में दुनिया की आबादी बढ़कर 200 करोड़ को गई। फिर भी इन्सान को समझ नहीं आया कि वो किस दिशा में बढ़ रहा है।